Thu. Nov 14th, 2019

Itihas Ke Panne

Mr. Pratapsinh Rajput (M.A. , PhD Pursing In History)

Arrival of Aryans || आर्यों का आगमन

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आर्यों का आगमन

इंडो-आर्यन-भाषी लोग उत्तर-पश्चिमी पहाड़ों से आए और पंजाब के उत्तर-पश्चिम में बसे और बाद में गंगा के मैदानों में जहाँ वे आर्य या इंडो-आर्यन के रूप में जाने जाते थे। ये लोग इंडो-ईरानी, इंडो-यूरोपियन या संस्कृत भाषा बोलते थे। आर्यन की उत्पत्ति के बारे में कोई सही जानकारी नहीं है, अलग-अलग विद्वानों का इस पर अलग-अलग विचार है। यह कहा गया है कि आर्य पूर्व (यूरेशिया), मध्य एशिया, आर्कटिक क्षेत्र, जर्मनी और दक्षिणी रूस में रहते थे।

वास्तव में, आर्यों को उन लोगों को कहा जाता था जो प्राचीन भारत-यूरोपीय भाषा बोलते थे और जिन्होंने प्राचीन ईरान और उत्तर पूर्वी महाद्वीपों में बसने के बारे में सोचा था। वैदिक काल से पूर्व में आर्य भारत में बस गए थे। इसे सप्तसिंधु या सात नदियों झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलज, सिंधु और सरस्वती की भूमि कहा जाता था।

घटना क्रम:

 

  • 1500 ई.पू. और 600 ई.पू. के युग को पूर्व वैदिक युग (ऋग वैदिक काल) तथा बाद के वैदिक युग में विभाजित किया गया |
  • पूर्व वैदिक काल : 1500 – 1000 ई.पू. यह वह युग था जब आर्यन्स भारत पर आक्रमण कर सकते थे |
  • उत्तर वैदिक काल (1000 – 600 ई.पू.)

वैदिक काल की विशेषताएं

शब्दों की बुनियाद से निकला वेद शब्द का अर्थ है “जानना” या “उच्च विद्या” | चार प्रकार के महत्वपूर्ण वेद हैं:

  1. ऋगवेद : यह 10 किताबों से बना है और इसमे 1028 भजन हैं जिन्हे अलग अलग ईश्वरों के लिए गाया गया है | मण्डल II से VII को पारिवारिक पुस्तक के नाम से जानते थे क्यूंकि यह पारिवारिक कथाओं जैसे गृतसमदा, विश्वामित्र, बामदेव, आरती, भारद्व्जा और वसीष्ठा पर आधारित थे |
  2. यजुर्वेद : यह राजनीतिक जीवन, सामाजिक जीवन, नियम और कायदों के बारे में बताता है जिन्हे हमे मानना चाहिए | यह कृष्ण यजुर वेद और शुक्ल यजुर वेद में विभाजित हैं |
  3. सामवेद : यह कीर्तन व प्रार्थनाओं की किताब है और इसमे 1810 भजन हैं |
  4. अथर्ववेद : यह जादुई वचनों , भारतीय औषिधियों और लोक नृत्य पर आधारित है |  

 

ब्राह्मण

  • ये वेदों की द्वितीय क्ष्रेणी से तालुक्क रखते हैं और इनका संबंध प्रार्थना और बलिदानों के समारोहों से है |
  • तंद्यमहा ब्राह्मण को सबसे पुराने ब्राह्मण माना जाता था और इनकी कई पौराणिक कथाएँ  हैं |
  • व्रत्यसोमा एक समारोह है जिसमे इन पौराणिक कथाएँ के द्वारा गैर आर्यन को आर्यन में बदला जाता था |
  • सतपथा एक बहुत महत्वपूर्ण तथा विस्तीर्ण ब्राह्मण है | यह वैदिक काल के दर्शन शास्त्र, धर्म शास्त्र, शैली और रीति-रिवाज के बारे में बताता है |
  • ब्राह्मण का आखिरी भाग अरण्यकस था | इसके दो भाग ऋगवेद से जुड़े थे ; आइतारेय और कौसितकी |
  • 108 प्रकार के दर्शन शास्त्र हैं जिनका  सीधा संबंध आत्मा से है | इन्हे उपनिषद कहते हैं |
  • बृहदर्णयका और चंदोग्य सबसे पुराने उपनिषद हैं |
  • यह वचन “सत्यमेव जयते” मुंडका उपनिषद से लिया गया है|

आर्यन का संघर्ष

  • आर्यन के प्रथम दस्ते ने भारत में लगभग 1500 B . C  में आक्रमण किया |
  • उन्हें भारत के मूल निवासियों जैसे दास व दस्यु से संघर्ष करना पड़ा|
  • हालांकि दास को आर्यन की तरफ से कभी भी आक्रमण के लिए उत्तेजित नहीं किया गया, पर दस्यु हत्या का ऋग वेद में बारबार उल्लेख किया गया है |
  • इन्द्र को ऋग वेद में पुरान्द्र के नाम से भी उल्लेख किया गया है जिसे किलों का भंजक भी कहा गया है |
  • पूर्व आर्यन के किलों का उल्लेख हरप्पा संस्कृति की वजह से भी किया गया है |
  • आर्यन मूल निवासियों पर इसलिए भी विजय प्राप्त कर पाये क्यूंकि उनके पास बेहतर हथियार,वरमान, तथा घोड़े वाले रथ थे |
  • आर्यन् दो तरह के संघर्षों  में व्यस्त रहे  एक तो स्वदेशी लोग व अपने आप में |
  • आर्यन को पाँच आदिवासी जातियों में विभाजित किया गया जिसे पंचजन कहा गया तथा गैर आर्यन की भी मदद प्राप्त की |
  • आर्यन गोत्र के शासक भरत व त्रित्सु थे जिन्हे वसिष्ठ पुरोहित मदद करते थे |
  • भारतवर्ष देश का नाम राजा भरत के ऊपर रखा गया

दसराजन युद्ध

  • भारत पर भरत गोत्र के राजा ने शासन किया तथा उन्हें दस राजाओं का विरोध भी झेलना पड़ा; पाँच आर्यन तथा पाँच गैर आर्यन|
  • इनके बीच में हुए युद्ध को दस राजाओं के युद्ध या दसराजन युद्ध के नाम से जाना  गया |
  • परुषनी या रावी नदी पर किया गया युद्ध सूद के द्वारा जीता गया |
  • बाद में भरत ने पुरू के साथ नाता जोड़ लिया जिससे कुरु नाम का नया गोत्र बना |
  • बाद के वैदिक युग में कुरु व पांचालों ने गंगा के ऊपरी पठारों की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जहाँ उन्होने एक साथ राज किया |

वैदिक काल में नदियाँ

  • सप्त सिंधु शब्द  या सात मुख्य नदियों के समूह का भारत के ऋग वेद में उल्लेख किया गया है |
  • वे सात नदियाँ थीं:
    1. पूर्व में सरस्वती
    2. पश्चिम में सिंधु
    3. सतुद्रु (सतलुज)
    4. विपासा (ब्यास)
    5. असिक्नी(चेनाब)
    6. परुषनी(रावी) और
    7. वितस्ता( झेलम)

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